
CGMSC Scam: रायपुर/राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी) में एक नया और गंभीर घोटाला सामने आया है, जिसमें सरकारी स्वास्थ्य आपूर्ति के नाम पर फर्जी कंपनियों और हवाला नेटवर्क के माध्यम से करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई।
इस घोटाले की कड़ियाँ मोक्षित ग्रुप के डायरेक्टर शशांक चोपड़ा, उनके भाई पवन बोहरा, और अन्य अधिकारियों से जुड़ी हुई हैं। शशांक चोपड़ा को पहले ही अपनी कंपनी मोक्षित कॉर्पोरेशन के खिलाफ संभावित कार्रवाई की जानकारी मिल गई थी, जिसके बाद उन्होंने अपने भाई पवन बोहरा के नाम पर ‘पारस डायग्नोस्टिक’ नामक नई फर्म तैयार कर ली।
मुंबई का फर्जी पता दिखाकर मिला सरकारी टेंडर
पारस डायग्नोस्टिक का संचालन वास्तव में राजनांदगांव से हो रहा था, लेकिन सीजीएमएससी की निविदा में इसे मुंबई की फर्म बताकर हिस्सा लिया गया। इसी फर्जीवाड़े के दम पर कंपनी को डिसइंफेक्टेड मशीन और रीजेंट की सप्लाई का रेट कॉन्ट्रैक्ट मिल गया।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, मोक्षित ग्रुप के एक अन्य डायरेक्टर शांतिलाल चोपड़ा और पवन बोहरा ने मिलकर इस अनुबंध के जरिए करीब 50 करोड़ रुपये का आर्डर ‘इंडेंटेड यूज़र्स’ के माध्यम से प्राप्त किया।
हवाला के जरिए पहुँची रिश्वत
ईडी की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि इस पूरे घोटाले में पवन बोहरा ने हवाला के जरिए संबंधित अधिकारियों तक अवैध रकम पहुँचाने का काम किया। हवाला से अर्जित रकम का उपयोग राजनांदगांव स्थित ‘एक्वा वाटर विलेज’ नामक वॉटर पार्क के निर्माण में किया गया। यह वही स्थान है जहाँ रीजेंट घोटाले की रणनीति बनाई गई। इतना ही नहीं, हाल ही में इसी वॉटर पार्क में एक 13 वर्षीय बच्चे की संदिग्ध मौत को भी पवन बोहरा की प्रशासनिक ‘सेटिंग’ के चलते दबा दिया गया।
जेम पोर्टल से उजागर हुई सच्चाई
सरकार के जेम पोर्टल से खरीद के आदेश जारी होते ही पारस डायग्नोस्टिक का रेट कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिया गया। दरअसल, इससे पहले फैथ बायोटेक नामक कंपनी कम दर पर गुणवत्तापूर्ण उपकरणों की आपूर्ति कर रही थी, लेकिन मोक्षित ग्रुप के दबाव के चलते उसे बाहर कर दिया गया।
ब्लैक मनी का निवेश ‘किंगडम ऑफ जॉय’ में
रायपुर के विधानसभा रोड पर स्थित हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट ‘किंगडम ऑफ जॉय’ में भी मोक्षित ग्रुप की ब्लैक मनी लगाए जाने के ठोस संकेत मिले हैं। बताया जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट में दो अधिकारियों की अवैध संपत्ति भी खपाई गई है। जिसमें से दो IAS और एक IFS बताया जा रहा है। इस विषय में ईओडब्लू और माननीय न्यायालय में शिकायत दायर की जा रही है।
सीजीएमएससी में हुए इस रीजेंट घोटाले ने राज्य की स्वास्थ्य आपूर्ति प्रणाली में गहरी सेंध लगाई है। फर्जी कंपनियों, हवाला नेटवर्क, और अफसर-नेता गठजोड़ के माध्यम से जनता के पैसों का दुरुपयोग किया गया। अब देखना यह है कि क्या जांच एजेंसियाँ इस घोटाले के सभी सूत्रधारों तक पहुँच पाएंगी या यह मामला भी पहले की तरह दबा दिया जाएगा।